आखिर यह अभियान क्यों?

भारत में लाखों लोग रोज़ भूखे सोते हैं। कई लोग अस्पतालों के बाहर... मज़दूर... रिक्शा चालक... दिहाड़ी श्रमिक... और जरूरतमंद परिवार एक समय का भोजन भी नहीं जुटा पाते। इसी समस्या का समाधान लेकर आया है

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एक रुपया क्यों?

यह ₹1 पैसों का मूल्य नहीं बल्कि सम्मान का प्रतीक है। हम चाहते हैं कि भोजन लेने वाला व्यक्ति कभी स्वयं को असहाय महसूस न करे। इसलिए हमने "निःशुल्क" नहीं "₹1" चुना।

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Sharda Welfare Society

Our Goal

शारदा वेलफेयर सोसायटी वर्ष 2015 से समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। हमारा विश्वास है कि किसी भी व्यक्ति को केवल आर्थिक अभाव के कारण भूखा नहीं रहना चाहिए। इसी सोच के साथ हमने "₹1 में भरपेट भोजन" अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सम्मानपूर्वक, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन पहुँचाना है।

आज के समय में जहाँ ₹1 का मूल्य लगभग समाप्त माना जाता है, वहीं हम इस एक रुपये को सम्मान, सहभागिता और आत्मसम्मान का प्रतीक मानते हैं। हमारा प्रयास केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति सहायता प्राप्त करते समय स्वयं को असहाय महसूस न करे।

यह अभियान मजदूरों, रिक्शा चालकों, दैनिक वेतनभोगियों, बुजुर्गों, जरूरतमंद परिवारों, राहगीरों और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक पौष्टिक भोजन पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य भूख के खिलाफ एक जनआंदोलन खड़ा करना है, जिसमें समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका निभा सके।

  • भूख मुक्त समाज की दिशा में प्रयास – जरूरतमंद लोगों तक सम्मानपूर्वक भोजन पहुँचाना।
  • भूख के खिलाफ जनआंदोलन – भोजन को दान नहीं, बल्कि मानव अधिकार के रूप में स्थापित करना।
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    प्रतिदिन भोजन प्राप्त करने वाले लाभार्थी

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    दिन भोजन का लक्ष्य

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    समर्पित सहयोगी

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    समाज सेवा का संकल्प

Our Food Programs

₹1 में भरपेट भोजन

हर जरूरतमंद व्यक्ति तक सम्मानपूर्वक, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन पहुँचाने का हमारा प्रमुख अभियान। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी को भूखा रहने के लिए मजबूर न करे। मात्र ₹1 के प्रतीकात्मक योगदान के साथ लोगों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

सम्मान के साथ सेवा

हम मानते हैं कि सहायता का सबसे सुंदर रूप वह है जिसमें व्यक्ति का आत्मसम्मान सुरक्षित रहे। इसी सोच के साथ यह अभियान संचालित किया जाता है ताकि भोजन प्राप्त करने वाला व्यक्ति स्वयं को किसी प्रकार की दया का पात्र नहीं, बल्कि समाज का सम्मानित सदस्य महसूस करे।

सामुदायिक सहभागिता

यह केवल एक संस्था का अभियान नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी का प्रयास है। स्वयंसेवकों, सामाजिक संगठनों, दानदाताओं और आम नागरिकों के सहयोग से यह मिशन अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच रहा है। हर सहयोग किसी भूखे व्यक्ति तक उम्मीद पहुँचाने का माध्यम बनता है।

भूख मुक्त भारत की ओर

हमारा लक्ष्य केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है। हम एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जहाँ किसी भी व्यक्ति को भूखा सोना न पड़े। यह अभियान उसी बड़े लक्ष्य की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है, जो मानवता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को नई पहचान देता है।

हमने सिर्फ भोजन नहीं परोसा...

हमने उम्मीद, सम्मान और मुस्कान बाँटी है।

हर दिन हजारों लोग ऐसे मिलते हैं जिनके लिए एक समय का भोजन जुटाना भी संघर्ष होता है। कोई दिहाड़ी मजदूर है जो पूरे दिन की मेहनत के बाद भी पेट भर भोजन नहीं कर पाता, कोई बुजुर्ग है जो अकेलेपन और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, तो कोई तीमारदार है जो अस्पताल में अपने मरीज के साथ रहकर स्वयं भूखा रह जाता है। ₹1 में भरपेट भोजन अभियान केवल भोजन उपलब्ध कराने की पहल नहीं है, बल्कि उन लोगों तक सम्मान और सहारा पहुँचाने का प्रयास है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ रहे हैं।

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